transformers in hindi | ट्रांसफार्मर क्या है | transformer kya hai

हेलों दोस्तों , मेरा नाम है संदीप। और मैं एक इलेक्ट्रीशियन हूँ। Sandipdhore.com के माध्यम से आप को इलेक्ट्रिक से सम्बन्धित जानकारी देता हूँ। 

 transformers in hindi के इस आर्टिकल में आज हम जानेंगे की ट्रांसफार्मर क्या होता है? ट्रांसफार्मर क्या काम करता है? ट्रांसफॉर्मर कितने प्रकार के होते हैं? ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करते है? ट्रांसफार्मर क्यों लगायें जाते है? इस सभी विषयों को आसान शब्दों में जानने की कोशिश करेंगे। 

transformers in hindi
transformers in hindi

 

दोस्तों, मुझे लगता है की ट्रांसफार्मर का नाम ना सुना हो, या ना देखा हो ऐसा शायद ही कोई होगा। क्यों की घरों में उसे होनेवाले कई इलेक्ट्रिक उपकरणों के साथ बड़े बड़े पॉवर स्टेशन पर इस का इस्तेमाल होता है। लेकिन ट्रांसफार्मर काम क्या करता है? ट्रांसफार्मर का क्या काम है? ट्रांसफार्मर क्यों लगाये जाते है? यह  सभी सवालों के जवाब आप को शायद पता नही होंगे।  तो इन सभी सवालों को हम transformers in hindi  के इस आर्टिकल में जानेंगे। तो चलों शुरू करते है। 

Table of Contents

ट्रांसफार्मर क्या है – transformers in hindi 

एक सर्किट के सप्लाई को बिना किसी फ्रीक्वेंसी और पॉवर में बदलाव किये दुसरे सर्किट में कम या ज्यादा के स्तर पर ट्रान्सफर करने के लिए जिस सयंत्र का प्रयोग होता  है, उसे ट्रांसफार्मर कहते है। इसे एक उदहारण के द्वारा आसान शब्दों में समझते है। 

आप के घर में एक ऐसा डिवाइस है जो 12 volt पर चलता है, लेकिन आप के घर में आनेवाली बिजली 220 volt की है, ऐसे में अगर आप डायरेक्ट उस डिवाइस को लगायेंगे तो वह जल जायेगा। क्यों की उस डिवाइस को जरूरत है सिर्फ 12 volt की, और आप दे रहे है 220 volt। ऐसे स्थिति में काम आता है ट्रांसफार्मर। ट्रांसफार्मर आप के घर से 220 volt लेगा, लेकिन करंट की फ्रीक्वेंसी और पॉवर में बदलाव किये बिना 12 volt परावर्तित करेगा, जिस से आप का 12 volt वाला डिवाइस जलेगा भी नही और अच्छे से काम भी करेगा।

मुझे लगता है की इतना आसान example समझने के बाद आप समझ गये होंगे की ट्रांसफार्मर क्या है? लेकिन स्टूडेंट्स के लिए थोडा टेक्निकल भाषा में इस की ट्रांसफार्मर की व्याख्या जान लेते है।

एक विद्युत परिपथ (circuit) से अन्य परिपथ (circuit)  में विद्युत प्रेरण द्वारा प्रत्यावर्ती धारा (AC current) की आवर्ती को बिना बदले विद्युत उर्जा स्थान्तरित करता है। उसे ट्रांसफार्मर कहाँ जाता है। 

और एक बात जो समझना जरुरी है, ट्रांसफार्मर AC current याने प्रत्यावर्ती धारा के साथ ही काम कर सकता है, याने ट्रांसफार्मर AC करंट को ही कम या ज्यादा कर सकता है,  ऊपर दिए गये उदाहरण में मैंने आप को बताया की ट्रांसफार्मर बिना किसी फ्रीक्वेंसी बदलाव के 220 volt को 12 volt करता है,  लेकिन AC current को DC current में कन्वर्ट करने के लिए आप को रेक्टिफायर की जरूरत होती है।

transformers in hindi -ट्रांसफार्मर का अविष्कार किसने किया? 

वैसे तो सब से पहले ट्रांसफार्मर का अविष्कार Michael faraday और जोसेफ हेनरी ने 1831 में किया था, लेकिन पहला व्यावहारिक ट्रांसफार्मर बनाने का श्रेय ओटो ब्लाथी को जाता है जिन्होंने अल्टरनेटिंग-करंट ट्रांसफॉर्मर का आविष्कार 1885 में अपने दो मित्र मिक्सा डेरी और कारोली ज़िपरनॉस्की के साथ मिलकर किया था जिसे ZBD मॉडल भी कहाँ जाता है। 

ट्रांसफार्मर का क्या काम है? Work for transformers in hindi 

ट्रांसफार्मर क्या है, इसे तो आप समझ ही गये होंगे। अगर नही समझे तो ऊपर दी हुई जानकारी फिर से पढ़ लीजिये। अब हम ट्रांसफार्मर का क्या काम है?इसे समझते है। ट्रांसफार्मर एक सिंपल structure पर काम करता है, किसी भी यंत्र या मशीन को लगनेवाला वोल्टेज यदि मिलनेवाले वोल्टेज से कम है, तो इस के लिए ट्रांसफार्मर का use किया जाता है।  जैसे की हम ने उपरोक्त उदहारण में बताया है। 

लेकिन मुझे लगता है की ट्रांसफार्मर के काम को समझने के पहले उस की संरचना को समझना उचित होगा। पीला हम संरचना को समझेंगे तो यक़ीनन ट्रांसफार्मर के काम को अच्छेसे समझ पाएंगे। 

ट्रांसफार्मर की संरचना – structure of transformers in hindi 

ट्रांसफार्मर की रचना मुख्यत: तिन भागों पर आधारित होती है। जिसे में दो भाग वाइंडिंग के होते है और एक कोर (core) का। किसी भी प्रकार के ट्रांसफार्मर में यह तिन पार्ट आवश्यक रूप से देखे जाते है। और अपने types के हिसाब से ट्रांसफार्मर में अन्य और भी पार्ट add होते है। 

इसलिए यहाँ हम मुख्य तिन भागों को समझकर अन्य पार्ट को list के माध्यम से ही संक्षिप्त में बताएँगे।

  1. ट्रांसफार्मर की प्राइमरी वाइंडिंग
  2.  ट्रांसफार्मर की मैग्नेटिक core 
  3. ट्रांसफार्मर की सेकंडरी वाइंडिंग

ट्रांसफार्मर की प्राइमरी वाइंडिंग

ट्रांसफार्मर में जिस वाइंडिंग पर AC इनपुट सप्लाई याने आनेवाला प्राथमिक AC करंट की सप्लाई दी जाती है। उसे प्राइमरी वाइंडिंग या प्राथमिक वाइंडिंग कहते हैं।

ट्रांसफार्मर की मैग्नेटिक core 

ट्रांसफार्मर की कोर सिलिकॉन स्टील की पत्तियों द्वारा बनाई जाती है और यह कौर ट्रांसफार्मर में होने वाले iron और Eddy करंट Loss को कम करने के लिए लगाई जाती है। और इन पत्तियों की चौड़ाई 0।35 mm से 0।75 mm के बीच में होती है और इन पत्तियों को आपस में वार्निश से जोड़ा जाता है। ट्रांसफार्मर में यह पत्तियां मुख्यतः E, I, L आदि के आकार में लगाई जाती है।

ट्रांसफार्मर की सेकंडरी वाइंडिंग

ट्रांसफार्मर की सेकेंडरी वाइंडिंग से हमें आउटपुट मिलता है, जिस मशीन या उपकर्ण को हमें कम वोल्टेज पर चलाना है। याने यूं कहें कि ट्रांसफार्मर की जिस वाइंडिंग पर लोड कनेक्ट किया जाता है उसे सेकेंडरी वाइंडिंग कहते हैं।

In मुख्य तिन पार्ट के साथ कई types के ट्रांसफार्मर में अन्य पार्ट भी होते है, जैसे 

  • Conservator tank
  • इंसुलेटेड शिट
  • ऑइल लेवल इंडिकेटर 
  • Bushing
  • रेडियेटर फैन 
  • Oil filling pipe
  • Cooling Tube
  • Thermometer

ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करते है?

जब ट्रांसफार्मर की प्राइमरी वाइंडिंग को AC Supply से जोड़ा जाता है। तब प्राइमरी वाइंडिंग के चारो ओर बदलती चुंबकीय रेखाएं निर्माण होती हैं, जिसे मैग्नेटिक फ्लक्स कहाँ जाता है, मैग्नेटिक फ्लक्स के कारण स्थिर कंडक्टर से कट जाती हैं। और याह मैग्नेटिक फ्लक्स ट्रांसफार्मर में लगे core की माध्यम से सेकेंडरी वाइंडिंग में पास किया जाता है। जब मैग्नेटिक फ्लक्स core के माध्यम से सेकेंडरी वाइंडिंग में पहुचते  है तब सेकेंडरी वाइंडिंग आउटपुट से जोड़ी होती है, और जरूरत के हिसाब से सप्लाई को कम या ज्यादा फ्लो करती है।

 ट्रांसफॉर्मर कितने प्रकार के होते हैं? types of transformer in hindi

ट्रांसफार्मर कई प्रकार के होते है, जो अलग अलग कामों के लिए इतेमाल किये जाते है। जैसे, 

  • Core की रचना के आधार पर 
  • वोल्टेज लेवल के आधार पर 
  • फेज के आधार पर 
  • इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर 

Core की रचना के आधार पर 

 Core की रचना के आधार पर दों तरह के ट्रांसफार्मर होते है, जिसे शेल टाइप ट्रांसफार्मर और कोर टाइप ट्रांसफार्मर कहाँ जाता है। 

शेल टाइप ट्रांसफार्मर

यह E या I आकार की धातु की पट्टियों से बनाया जाता है इसमें तीन लिब पड़े होते है जिसमे से एक लिब पर दोनों वाइंडिंग की जाती है वाइंडिंग बीच वाले लिब पर की जाती है जिसका क्षेत्र दोनों साइड वालो से दो गुना होता है कम वोल्टेज वाली वाइंडिंग कोर के नजदीक की जाती है और ज्यादा वोल्टेज वाली वाइंडिंग कम वोल्टेज वाली वाइंडिंग के ऊपर की जाती है। ताकि इन्सुलेशन आसानी से किया जा सके इसमें मेगनेटिक फ्लक्स के लिए दो रास्ते होते है। इस तरह के ट्रांसफार्मर को कम वोल्टेज के लिए यूज कियाजाता है।

कोर टाइप ट्रांसफार्मर

यह ट्रांसफार्मर L आकार सिलिकोन स्टील की पट्टियों को इन्सुलेट करके जोड़ कर बनाया जाता है इसकी बनावट आयताकार रूप में होती है यह इसके चार लिब होते है जिनमे से दो आमने सामने वाले लिबो पर वाइंडिंग की जाती है इसमें मेगनेटिक फ्लक्स के लिए केवल एक ही रास्ता होता है यह हाई वोल्टेज के लिए यूज किया जाता है।

वोल्टेज लेवल के आधार पर 

वोल्टेज लेवल के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते है स्टेप अप ट्रांसफार्मर जो वोल्टेज लेवल को बढ़ाते है और स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर वोल्टेज लेवल को घटाते है।

स्टेप अप ट्रांसफार्मर

जो ट्रांसफार्मर प्राइमरी वाइंडिंग को दिए हुए वोल्टेज को ज्यादा वोल्टेज में बदल कर आउटपुट वोल्टेज ज्यादा देता है, उस ट्रांसफार्मर को स्टेप उप ट्रांसफार्मर कहते हैं। इस की प्राइमरी वाइंडिंग कम टर्न्स और ज्यादा मोटे तार की होती है। और सेकंडरी वाइंडिंग ज्यादा टर्न्स की और कम मोटे तार की होती है। जिस जगह वोल्टेज बढ़ाना पड़ता है, उस जगह स्टेप अप ट्रांसफार्मर का उपयोग होता है।

स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर

ट्रांसफार्मर प्राइमरी वाइंडिंग को दिए हुए वोल्टेज को कम वोल्टेज में बदलकर आउटपुट वोल्टेज कम देता है, उस ट्रांसफार्मर को स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर कहते हैं। 

स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर की प्राइमरी कम मोटे तार की और ज्यादा टर्न्स की होती है। सेकंडरी कम टर्न्स और मोटे तार से बनी होती है। इस ट्रांसफार्मर का उपयोग वोल्टेज को कम करने के लिए किया जाता है।

फेज के आधार पर 

सिंगल फेज ट्रांसफार्मर

सिंगल फेस AC।सप्लाई पर कार्य करने वाला ट्रांसफार्मर होता है यह ट्रांसफार्मर सिंगल फेज की वोल्टेज को कम या ज्यादा करता है उसे सिंगल फेज ट्रांसफार्मर कहते हैं इसमें दो वाइंडिंग होती है प्राथमिक और द्वितीयक वाइंडिंग प्राथमिक वाइंडिंग में सिंगल फेज विद्युत सप्लाई दी जाती है और द्वितीयक वाइंडिंग में सिंगल फेज विद्युत सप्लाई स्टेप डाउन या स्टेप अप के रूप में ली जाती है।

थ्री फेज ट्रांसफार्मर

थ्री फेज AC। सप्लाई पर कार्य करने वाले ट्रांसफार्मर को थ्री फेज ट्रांसफार्मर कहते हैं इसमें तीन प्राथमिक तथा तीन द्वितीयक वाइंडिंग होती है यह सेल या कोर टाइप के होते हैं इनका उपयोग 66, 110, 132, 220, 440 KVA स्टेप अप करके ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है और जो डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली में जो ट्रांसफार्मर होते है वे थ्री फेज ट्रांसफार्मर होते हैं और आजकल थ्री फेज ट्रांसफार्मर का ही अधिक प्रयोग होता है।

इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफार्मर

इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफर्मर यह एक प्रकार का स्टेप अप ट्रांसफार्मर या स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर ही होता है। लेकिन इसके सेकंडरी वाइंडिंग को एक कम रेंज के वोल्टमीटर या अमीटर कनेक्ट होता है। इसका उपयोग HT Line का करेंट और वोल्टेज मेजर करने के लिए किया जाता है। 

संबोधन 

दोस्तों ट्रांसफार्मर क्या है? What is transformer in hindi में आप ने जाना है, साथ ही ट्रांसफार्मर क्या होता है? ट्रांसफार्मर क्या काम करता है? ट्रांसफॉर्मर कितने प्रकार के होते हैं? ट्रांसफार्मर किस सिद्धांत पर कार्य करते है? ट्रांसफार्मर क्यों लगायें जाते है?। what is electrical transformers in hindi, types of transformer in hindi, how many types of transformer in hindi, transformer kya hai, what transformer hindi जैसे सभी सवालों के जवाब आप को मिल ही गये होंगे।

अगर आप के पास इस से सम्बन्धित कोई सवाल या सुचना हमारे लिए है तो आप हमें कमेंट बॉक्स मी लिख सकते है।

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