हमें कैसे पढ़ना चाहिए - पढाई के टिप्स स्टूडेंट्स के लिए  

पढाई से हमारी सोचने की क्षमता विकसित होती है, जिस से हम अपने विचारों को विस्तार देते है। 

कोई भी शिक्षक किसी भी स्टूडेंट्स को सिर्फ बता सकता है, पढ़ा नही सकता, स्टूडेंट्स को खुद ही पढना होता है। 

शिक्षक जो हमें बताते है उस का आकलन कर व्यापक तौर पर उसके पठन, मनन और चिंतन को ही पढाई कहते है। 

किसी भी विषय का आकलन हम तब कर सकते है, जब हम खुद को उस विषय को समझने के लिए प्रेरित करते है। 

पढाई के वक्त ध्यान इसीलिए भटकता है, क्यों की हम उस विषय को समझ नही पाते और फिर हम पढाई को बोझ समजने लगते है।  

पढाई के वक्त जो भी विषय हमें मुश्किल लगता है, उस के लिए हमे उस विषय को शुरुवात से समझने की जरूरत होती है। 

जब हम किसी विषय को शुरु से समझने की शुरवात करते है तब उस विषय की सरलता का हमें आभास होता है। 

किसी भी शिक्षक द्वारा बताई गयी बात को हम अपने आकलन से कितनी आसानी से रख पाते है, इस का अभ्यास एक स्टूडेंट्स के लिए जरुरी है। 

जब हम किसी भी विषय को खुद से समझने की कोशिश करते है तो यक़ीनन पढाई आसान हो जाती है।